Download Our Mobile App

📲 GET

नवरात्रि के 9 दिन और मां दुर्गा के 9 स्वरूप

हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति, भक्ति और साधना का विशेष अवसर माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। प्रत्येक स्वरूप देवी शक्ति के एक विशेष गुण और स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है। भक्त इन नौ दिनों में व्रत, पूजा, मंत्र जाप, दुर्गा सप्तशती पाठ और कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां के एक विशेष स्वरूप की आराधना करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से नवदुर्गा की पूजा करने से जीवन में शक्ति, साहस, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

1. प्रथम दिन – मां शैलपुत्री

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैलपुत्री का अर्थ है “पर्वतराज हिमालय की पुत्री”। इन्हें मां पार्वती का स्वरूप माना जाता है।

मां शैलपुत्री के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल सुशोभित होता है तथा उनका वाहन वृषभ है। नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है।

मां शैलपुत्री को स्थिरता, शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। भक्त उनसे अपने जीवन में सुख, शांति और आत्मबल की कामना करते हैं।

2. द्वितीय दिन – मां ब्रह्मचारिणी

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। मां ब्रह्मचारिणी तप, संयम और साधना की देवी मानी जाती हैं।

मां के एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में जपमाला होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्तों को धैर्य, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होने की मान्यता है।

3. तृतीय दिन – मां चंद्रघंटा

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। माता के मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार का घंटा सुशोभित होता है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप साहस और वीरता का प्रतीक माना जाता है। उनका वाहन सिंह है और वे अपने भक्तों को नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजित हैं।

मां की पूजा से मन में शांति और आत्मबल बढ़ने की मान्यता है।

4. चतुर्थ दिन – मां कूष्मांडा

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी।

इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में भी देखा जाता है। मां कूष्मांडा का वाहन सिंह है और वे अपने भक्तों को स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं।

इस दिन भक्त विशेष रूप से मां की आराधना कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

5. पंचम दिन – मां स्कंदमाता

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय अर्थात स्कंद की माता हैं।

मां की गोद में बाल स्वरूप भगवान स्कंद विराजमान रहते हैं। उनका वाहन सिंह है। स्कंदमाता को मातृत्व, करुणा और वात्सल्य का प्रतीक माना जाता है।

भक्त मां से परिवार की सुख-शांति, संतान की उन्नति और जीवन में सकारात्मकता की प्रार्थना करते हैं।

6. षष्ठम दिन – मां कात्यायनी

छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी कात्यायनी को शक्ति और साहस का स्वरूप माना जाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसी कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा।

मां कात्यायनी का स्वरूप अन्याय और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का प्रतीक है। भक्त इस दिन मां की पूजा कर साहस, सफलता और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

7. सप्तम दिन – मां कालरात्रि

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। मां का स्वरूप उग्र और शक्तिशाली माना जाता है।

मां कालरात्रि को अज्ञान, भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी माना जाता है। उनका वाहन गर्दभ है और उनका स्वरूप भक्तों को निर्भयता का संदेश देता है।

मान्यता है कि मां कालरात्रि की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भय और नकारात्मकता दूर होती है तथा भक्तों को आत्मबल प्राप्त होता है।

8. अष्टम दिन – मां महागौरी

आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और दिव्य माना जाता है।

धार्मिक कथाओं के अनुसार, कठोर तपस्या के कारण मां का शरीर अत्यंत काला हो गया था। भगवान शिव की कृपा से उन्हें गौर वर्ण प्राप्त हुआ और वे महागौरी कहलायीं।

मां महागौरी को पवित्रता, शांति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन और विशेष पूजा का भी महत्व है।

9. नवम दिन – मां सिद्धिदात्री

नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, मां सिद्धिदात्री को सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी माना जाता है।

मां कमल पर विराजमान रहती हैं और उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य एवं शांत है। भक्त नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा कर आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

नवरात्रि के नौ दिनों की साधना मां सिद्धिदात्री की आराधना के साथ पूर्ण होती है।

नवदुर्गा की पूजा का महत्व

नवरात्रि केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक साधना का अवसर भी है। नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करके भक्त शक्ति के अलग-अलग रूपों का स्मरण करते हैं।

इन नौ स्वरूपों में जीवन के विभिन्न गुणों का संदेश मिलता है—शक्ति, तप, साहस, सृजन, मातृत्व, विजय, निर्भयता, शांति और सिद्धि।

नवरात्रि के दौरान घर और मंदिरों में दुर्गा सप्तशती पाठ, मंत्र जाप, हवन, कन्या पूजन और भोग अर्पण जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है।

निष्कर्ष

नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना के माध्यम से शक्ति और सकारात्मकता प्राप्त करने का पावन अवसर प्रदान करते हैं। मां शैलपुत्री से शुरू होकर मां सिद्धिदात्री तक की यह साधना भक्तों को जीवन में साहस, संयम, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश देती है।

यदि आप नवरात्रि के अवसर पर मां दुर्गा की विशेष पूजा, हवन, संकल्प या धार्मिक सेवा करवाना चाहते हैं, तो श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा-अनुष्ठान का आयोजन किया जा सकता है। मां दुर्गा की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।

जय माता दी।

Items in your cart

10% off on all products on first purchase

FIRST10 Apply Code
Order Summary
  • Cart Total ₹0.00
  • Promo Applied ₹0
  • Shipping ₹
  • Grand Total ₹0.00
$(document).ready(function () { $('#mobile-next-btn').on('click', function (e) { e.preventDefault(); $('.mobile-booking').show(); $('#puja-chadwa-offering').hide(); $('#fixed-cart').hide(); $('.footer-area-bg').css('padding-bottom', '0'); // Scroll to the #booking section $('html, body').animate({ scrollTop: $('#booking').offset().top - 170 }, 500); }); }); function onSubmitPopup(token) { var form = $(this); $.ajax({ type: "POST", url: '/register', data: form.serialize(), success: function (data) { if (data.status == true) { $("#div_alert").show(); $('#checkout-login-container').removeClass("right-panel-active"); $('.forgot-password-container').hide(); $('.sign-in-container').show(); toastr.success('Account is succesfully created.'); $('#popup-register-form').trigger("reset"); } else { toastr.error('Something went wrong, we will be right back.'); } } }); }